रामपुर, जेएनएन। नवाबों की संपत्ति की जांच को बनी समिति की मौजूदगी में कोठी खासबाग में आर्मरी (शस्त्रागार) को खोला गया, जिसमें हथियारों का जखीरा निकला। अलमारियों और संदूकों में विदेशी कंपनियों में निर्मित रायफल, बंदूक और पिस्टल से लेकर चाकू, खुकरी और तलवार निकलीं। जंक लगने से ज्यादातर हथियार बेकार हो चुके हैं। हजारों की तादाद में मिले हथियारों की गिनती कराई गई, जो पूरी नहीं हो सकी। इसमें अभी और दो दिन गिनती चलेगी।
इस दौरान पूर्व सांसद बेगम नूरबानो, पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां नवेद मियां, पूर्व सांसद की पुत्री बेगम सबा अहमद खान, निगहत आब्दी, पूर्व मंत्री के पीआरओ काशिफ खां, डिप्टी कलक्टर मान सिंह पुंडीर, सीओ विद्या किशोर, एडवोकेट कमिश्नर अरुण प्रकाश सक्सेना, अधिवक्ता हर्ष गुप्ता, अधिवक्ता सौरभ सक्सेना, अधिवक्ता संदीप सक्सेना, अधिवक्ता मुजम्मिल हुसैन, अधिवक्ता आमिर मियां, अधिवक्ता दानिश कमर, शस्त्र विक्रेता राशिद अली खां और आमिर खां मौजूद रहे। आपको बतादें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर संपत्ति का बंटवारा किया जा रहा है।
नवाब खानदान में संपत्ति बंटवारे का फैसला राज परिवारों के लिए नजीर
नवाब खानदान की संपत्ति के बंटवारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के तमाम राजपरिवारों के लिए नजीर बन गया है। पहला ऐसा फैसला है जो राज परिवारों की परंपरा के खिलाफ आया है। परंपरा के मुताबिक राज घराने का बड़ा बेटा ही संपत्ति का मालिक होता था लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने रामपुर के नवाब खानदान में संपत्ति बंटवारे को लेकर फैसला सुनाया है कि शरीयत के हिसाब से संपत्ति बांटी जाए।
यह है मामला
नवाब खानदान में खरबों रुपये की संपत्ति को लेकर 1972 से मुकदमेबाजी चल रही थी। पांच माह पहले देश की सबसे बड़ी अदालत ने फैसला सुनाया कि नवाब खानदान में बंटवारा शरीयत के हिसाब से होगा। नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां बताते हैं कि देश में आजादी से पहले राज परिवारों में बड़ा बेटा ही संपत्ति का हकदार होता था। आजादी के बाद राजशाही खत्म हो गई लेकिन, इसके बाद भी इसी परंपरा पर चलते हुए तमाम राज परिवारों में बड़े बेटे ही संपत्ति पर काबिज होते रहे।
रामपुर में नवाब रजा अली खां के तीन बेटे थे। सबसे बड़े बेटे मुर्तजा अली खां के कब्जे में अधिकांश संपत्ति रही। इसके विरोध में परिवार के दूसरे सदस्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, तर्क दिया कि जब राजशाही नहीं रही तो फिर बंटवारा भी उसकी परंपरा के अनुसार न किया जाए। इस मुकदमे में 1996 में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें राजशाही परंपरा की जीत हुई। इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि शरीयत के हिसाब से बंटवारा किया जाए।
कई रियासतों की संपत्ति बंटवारे के मामले कोर्ट में विचाराधीन
नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने बताया कि देश के कई राज परिवारों में बंटवारे को लेकर मुकदमेबाजी चल रही है और उन परिवारों के कई सदस्यों ने हमसे संपर्क किया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में जानकारी ली है। वे रामपुर के फैसले को अपने मुकदमों में नजीर के रूप में पेश करेंगे। उन्होंने बताया कि नवाब पटौदी, कपूरथला स्टेट, पन्ना स्टेट समेत कई रियासतों के बंटवारे के मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं।
चल रहे मुकदमों पर पड़ेगा असर
पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता हर्ष गुप्ता ने बताया कि यह देश का पहला ऐसा फैसला है, जो राज परिवारों की परंपरा के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का देश के तमाम राज परिवारों के संपत्ति के बंटवारे संबंधी मुकदमों पर असर पड़ेगा। यह नजीर के रूप में पेश किया जाएगा।